सिले होंठों से कुछ कहना चाहता हूँ

सिले होंठों से कुछ कहना चाहता हूँ
गुमी हुई आवाज़ फिर सुनना चाहता हूं
चौड़ी छाती से आती धड़कनो के बदले
अपने जीवन की हर पूंजी देना चाहता हूँ।

ग़ौद के तकिये में रख कर सर
चेन की वो एक नींद चाहता हूँ
हर खतरे से निडर  होकर
तेरे आँचल का वो एक एहसास  चाहता हूँ।

तेरे नाम का मान जीवन में
सूर्य सामान अमर करना चाहता हूँ
अपने कंधो को मजबूत बनाके
तेरे भार से, तुझे मुक्त करना चाहता हूँ।

यूँ गीली मिटटी की खुशबु सूंघ कर
बचपन का वो स्वाद चाहता हूँ
तेरा मेरा करते करते बीत गयी जो हर साँस
हर उस वक़्त का हिसाब चाहता हूँ।

आखिरी ज्योति के भुझ ने से पेहेले
एक ख्वाइश को पूरा करना चाहता हूँ।
अमर तो में नही ये जान चूका हूँ
अपनों के दिल में एक जगह चाहता हूँ , एक जगह चाहता हूँ , एक जगह चाहता हूँ

-- Ksaket


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